श्रीकृष्ण जी की आरती (Lord Krishna Aarti)

श्रीकृष्ण जी की आरती (Lord Krishna Aarti)

हिंदू धर्म में कृष्ण जी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता का ज्ञान देकर एक बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर इनकी विशेष पूजा आराधना की जाती है। श्रीकृष्ण जी की पूजा में श्रीकृष्ण चालीसा, मंत्र और आरती का विशेष प्रयोग किया जाता है। पढ़ें कृष्ण जी की आरती (Krishna Aarti) ।

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार और हिन्दू धर्म के ईश्वर माने जाते हैं। कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश, वासुदेव आदि नामों से भी उनको जाना जाता हैं। कृष्ण निष्काम कर्मयोगी, एक आदर्श दार्शनिक, स्थितप्रज्ञ एवं दैवी संपदाओं से सुसज्ज महान पुरुष थे। उनका जन्म द्वापरयुग में हुआ था। उनको इस युग के सर्वश्रेष्ठ पुरुष युगपुरुष या युगावतार का स्थान दिया गया है। कृष्ण के समकालीन महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत और महाभारत में कृष्ण का चरित्र विस्तुत रूप से लिखा गया है। भगवद्गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद है जो ग्रंथ आज भी पूरे विश्व में लोकप्रिय है। इस कृति के लिए कृष्ण को जगतगुरु का सम्मान भी दिया जाता है। कृष्ण वसुदेव और देवकी की 8वीं संतान थे। मथुरा के कारावास में उनका जन्म हुआ था और गोकुल में उनका लालन पालन हुआ था। यशोदा और नन्द उनके पालक माता पिता थे। उनका बचपन गोकुल में व्यतित हुआ। बाल्य अवस्था में ही उन्होंने बड़े बड़े कार्य किये जो किसी सामान्य मनुष्य के लिए सम्भव नहीं थे। मथुरा में मामा कंस का वध किया। सौराष्ट्र में द्वारका नगरी की स्थापना की और वहाँ अपना राज्य बसाया। पांडवों की मदद की और विभिन्न आपत्तियों में उनकी रक्षा की। महाभारत के युद्ध में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई और भगवद्गीता का ज्ञान दिया जो उनके जीवन की सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है। 124 वर्षों के जीवनकाल के बाद उन्होंने अपनी लीला समाप्त की। उनकी मृत्यु के तुरंत बाद ही कलियुग का आरंभ माना जाता है।

श्रीकृष्ण जी की आरती (Lord Krishna Aarti)

ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे

भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे. जय जय श्री कृष्ण

हरे….

परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी.

जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी.जय

जय श्री कृष्ण हरे….

कर कंचन कटि कंचन श्रुति कुंड़ल माला

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला.जय जय

श्री कृष्ण हरे….

दीन सुदामा तारे, दरिद्र दुख टारे.

जग के फ़ंद छुड़ाए, भव सागर तारे.जय जय

श्री कृष्ण हरे….

हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे.

पाहन से प्रभु प्रगटे जन के बीच पड़े. जय जय

श्री कृष्ण हरे….

केशी कंस विदारे नर कूबेर तारे.

दामोदर छवि सुन्दर भगतन रखवारे. जय जय

श्री कृष्ण हरे….

काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे.

फ़न फ़न चढ़त ही नागन, नागन मन मोहे. जय जय

श्री कृष्ण हरे….

राज्य विभिषण थापे सीता शोक हरे.

द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे. जय जय

श्री कृष्ण हरे….

ॐ जय श्री कृष्ण हरे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *